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मुझे बुरे सपने कम आते हैं। यूजुअली मुझे ठीक ठाक सपने आते हैं। कुछ एसटेरिक सपने आते हैं। कुछ नेजल एलर्जी रहती है तो मैं जल्दी उठ जाता हूं। बट सपनों से डर के उठना बहुत रेयर होता है। अगर कोई खौफनाक सपना भी देख रहा हूं तो इतनी जल्दी मैं उठ के नहीं बैठता।
लेकिन एक सपना ऐसा है जिसको जब भी आता है यह मुझे बहुत खौफजदा कर जाता है। मेरे अंतरात्मा तक हिल जाती है और मैं बड़ा बेचैन होकर उठता हूं। यह कोई भूत प्रेत वाला सपना नहीं है। यह कोई बहुत वायलेंट सपना नहीं है। इस सपने को मैंने जिया है और यह सपना है कि मैं कहीं नौकरी कर रहा हूं।
मुझे याद है जब मैं छोटा होता था। लग्न में सूर्य लेकर पैदा हुआ। मकर लग्न तो यह कहता है, साहब, नौकरी-नौकरों के लिए होती है। तो मुझे बहुत डांट पड़ती थी। तो ऐसे कैसे बोल सकता है यह वो? तो ठीक है जब मौका पड़ा यूथ में आए। एक उम्र थी, जिसमें कि काम करना था। एंड हम अर्ली मिलेनियल्स लकी रहे कि हमारी जब जवानी आई तो हमारे पास उसमें तभी कंप्यूटर क्रांति आई देश में और आउटसोर्सिंग वगैरह शुरू हुई। तो हमको मौके बहुत मिले। आज के यूथ के जैसे हमने इतना स्ट्रगल नहीं किया जॉब्स के लिए, मतलब उस समय बिल्कुल यह नई नई आईटी इंडस्ट्री थी और एकदम से जॉब मार्केट बूम हो रहा था। इतना रायता नहीं फैला हुआ था। आई वगैरह जैसा कुछ नहीं था। अमेरिकन्स और यूरोपियन इंडियन लेबर की स्किल सेट को समझ रहे थे और काफी सारा काम वहां से यहां आ रहा था। फाइनेंस सेक्टर बーム कर रहा था, आईटी सेक्टर बूम कर रहा था, तो इस गरीब ने भी नौकरी पकड़ ली।उसके बाद स्टार्ट छोटी कंपनी से किया, फिर एमबीए किया, फिर बड़ी कंपनी में गए। तरक्की करी। अअअ पंजाबी में कहे तो वडेफसर बन गए। बट एक सिस्टम में एक चूहे की तरह से दौड़ते रहे। और दूसरों से आगे निकलने की एक इच्छा, खुद को साबित करने का जुनून। मैंने यह देखा कि हिंदुस्तानी जब बचपन से शुरू होते हैं, हमें दो चीजें सिखाई जाती हैं। जिस पर मैं आपकी तवज्जो चाहूंगा। हमें सिखाया जाता है कि आपस में कंप्लीट करो और अथॉरिटी को सलाम करो।
वो authority कोई भी हो सकता है। वो parents हो सकते हैं, वो teachers हो सकते हैं, वो society हो सकती है, वो office का boss हो सकता है, वो government officers हो सकते हैं।
सो the idea basically is लोगों को आपस में लड़वाते रहो और उनपर आज करो, एक घर के बुजुर्ग से ले करके और top के politicians तक formula यही है। अ� मैं कंप्लीट करो और authority को सलाम करो। इसीलिए इस मुल्क में कभी भी कोई अथॉरिटी से सलाम नहीं करता। कोई कभी टीचर्स से, पेरेंट्स से, एल्डर्स से, पॉलीटिशियन से कोई सवाल नहीं करता। अगर कोई सवाल करेगा तो उसके पीछे भगत मंडली आ जाएगी, अपने मालिक को डिफेंड करने। अब वो मालिक चाहे कंपनी हो, चाहे बॉस हो, चाहे कोई पॉलीटिकल पार्टी हो, चाहे कोई पॉलीटिशियन हो, चाहे कोई सुपरस्टार हो। देखो यह पागलखाना है ये। यह पागलखाना है। इससे इंसान क्या होता है, सिस्टम का गुलाम बना रहता। यह सिस्टम एक परसेंट लोग चला रहे हैं और 90 परसेंट लोग उनका साथ दे रहे हैं। 90 परसेंट लोग अंधे हैं। सिस्टम के द्वारा एक्सप्लॉइट हो रहे हैं। उनको दिखता नहीं और मेरे जैसे जो बचे खुचे 5-7 परसेंट अवेकेंड हो चुके हैं। सोसाइटी के लोग वो कुछ कहना चाहते हैं तो एक ट्रोल आर्मी या भगत आर्मी या जो भी सोसाइटी के जॉम्बीज हैं, उनपे टूट पड़ते हैं।
मैं अपने अतीत के बारे में ज्यादा बात करना नहीं चाहता क्योंकि इट इज नॉट अबाउट मी। लेकिन एक वक्त था जब मैं कंपनीज के लिए पूरी तरह डेडीकेटेड कॉर्पोरेट सैंप होता था, यू नो? एटीन आवेर शिफ्ट्स एंड वर्किंग वीकेंड्स एंड ट्राइंग टू गेट टू द नेक्स्ट प्रमोशन एंड द नेक्स्ट इनक्रीमेंट। कोई जरूरतें थी, कुछ एंबीशन थी। यूं लगता था कि भाई नेक्स्ट लेवल पहुंच गए तो कुछ हो जाएगा, फिर उसके नेक्स्ट पहुंच गए तो कुछ हो जाएगा। अब घर में इस चीज की आवश्यकता... तो ये करना, वो करना। सो वो मकड़जाल में वो जैसे गधे के आगे रस्सी, गाजर लटका देता है ना, वो काम।
जिस दिन मैंने जॉब छोड़ी उसकी बुनियाद बहुत पहले रखी गई थी। आफ्टर अ लॉट ऑफ हैरोविंग एक्सपीरियंसेस मैंने अपने एक सीनियर का फोन नंबर ब्लॉक कर दिया। सो मेरे जो दूसरे सीनियर थे, वो मेरे पास में गुड गाय, लाइक मेंटर। बोले तूने उनको ब्लॉक क्यों कर दिया? मैंने कहा, 'मैं इस इंसान से बात नहीं करना चाहता।' क्या करोगे?
मैं इससे बात नहीं करूंगा। बोला भाई, तू तो पूरा बागी हो गया। मैंने कहा, 'अरे इससे ज्यादा नहीं चलता।' तब तक केतु पीरियड भी चल रहा था मेरा। सो वहां से मेरा एक उम्म फॉलाउट शुरू हुआ। एक जिसे कहते हैं न डिसइल्ल्यूज़नमेंट शुरू हुआ। नौकरी और कॉर्पोरेट सर-किर्किट से। उसके बाद में मेरे काफी दो ढाई साल मुश्किल निकले। जी। कुछ अच्छे लोग मिले। कुछ खराब लोग मिले। मेरा अपना नसीब। फिर एक दिन मैंने फाइनली सोचा कि यार, दिस इज नॉट वर्थ और मैंने रेजिग्नेशन डाल दिया। उसके बाद से मैंने कुछ भी किया। मैंने कभी एक दिन के लिए नहीं सोचा कि मैं वापस जाकर के नौकरी करूंगा।
उसके बाद मैं दो-चार छोटे-मोटे काम किए केतु राहों में। केतु गुरु आते-आते मेरा एस्ट्रोलॉजी का काम चल गया और आज तक भगवान की कृपा से और आप लोगों के प्यार से वो चल रहा है। Honest Astrologer ने मुझे एक नई जिंदगी दी है। It is the best thing that has happened to me in a very very long time।
उसके बाद जब मेरी अवेकनिंग हुई, आई बिकेम ऐब्सोल्यूटली अनइंप्लॉयेबल। अब मैं जिंदगी में कुछ भी कर सकता हूं; मैं कभी नौकरी नहीं कर सकता। सब्सिडी लेते हैं क्यों? क्योंकि मैंने वह फ्रीडम चख लिया है। मैंने उस अवेकेंटिंग देख ली है। मैंने उस सिस्टम को आर-पार से देख लिया है। अब मैं कभी भी सिस्टम का गुलाम नहीं बन सकता था मैं। मुझे याद है मेरी एक पुरानी बॉस ने मुझे एक दिन फोन आया। वो बोले कि "वेयर नाइस लेडी?" वो बोले कि "यार, जयपुर में एक अपॉर्चुनिटी है, एचआर में, एचआर हेड के"। मैंने कहा कि बस बिटवीन एक अपॉइंटमेंट लेटर और एक साइनाइड कैप्सूल में मैं साइनाइड कैप्सूल सुन लेना ज्यादा पसंद करूंगा। बोली "तुझे क्या हो गया?" मैंने कहा कि बस मेरी आंखें खुल गए हैं। बट थैंक यू सो मच, आई लव यू फॉर दिस, बट नो थैंक यू।
तो अब अगर मैं सपने में भी देख लेता हूं कि मैं कहीं पर नौकरी कर रहा हूं तो मैं डर के उठ जाता हूं। फिर नींद आना मुश्किल हो जाता है मुझे।
सो आई थॉट कि यह चीज मैं आप लोगों से शेयर करूंगा। मैं आपको नहीं कह रहा कि आप जॉब छोड़ दीजिए या आप काम करना छोड़ दीजिए। जॉब है, कीजिए, काम है, कीजिए। जब तक कुछ और नहीं मिलता, करते रहिए। लेकिन इस सिस्टम की सच्चाई समझिए। सिस्टम किसी का सगा नहीं होता। सिर्फ आपको लग रहा है जी, मैं बड़ी कड़ी मेहनत करके ये कड़ी मेहनत का पागलखाना हमें अंग्रेज दे गए और हमारे बुजुर्गों ने इसको एम्पावर कर दिया। कड़ी मेहनत से कुछ नहीं होता। जो लोग ऊपर बैठे हैं, वो भी उतने घंटे काम करते, जितने घंटे नीचे वाले करते। शायद कम ही घंटा काम करते होंगे।
जो ग्रोथ होती है, जो सक्सेस आता है, वो विस्डम से आता है। इंटेलिजेंस भी मैं नहीं कहूंगा। विस्डम से आता है। अगर हार्ड वर्क से कुछ होता तो जितने मजदूर, रिक्शा वाले, रेहड़ी वाले जो अठारह घंटे बेचारे खुद को रगड़ते हैं, जिनके हाथ की एक एक नस दिखती है, वो लोग दुनिया पर राज कर रहे होते हैं।
सो जॉब अगर पैसे के लिए जरूरत है उतनी ही करें। प्राण नहीं दे दे। जैसा मैंने किया। आज मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा अफसोस में से एक यह है कि मैंने अपने कंपनियों के लिए बहुत काम किया। ठीक है मुझे रिवार्ड्स भी मिले, पैसा भी मिला। बट अगर आई कुड गो बैक क्या मैं वह सब दोबारा करूंगा? Never, never is the answer. I will never work hard for anyone else.
आज मैं जो काम करता हूं लगभग सभी में बहुत एंजॉय करता हूं। बहुत दिल से करता हूं। आज मैं इस बुढ़ापे में भी काम करता रहता हूं। ठीक है कॉल्स मैं लिमिटेड लेता हूं। बट सोशल मीडिया और यह कंटेंट जनरेशन इन चीजों में मुझे अच्छा लगता है। अपने विचार लोगों से साझा करना, कुछ लोगों को इंस्पायर करना या शायद किसी चीज से कोई भला हो जाए या टॉकिंग अबाउट स्पिरिचुअल ईजोटॉइक थिंग्स, यह सब अच्छा लगता है मुझे करना।
तो मेरे लिए जिंदगी एक बहुत प्यारा सफर हो गई है, मां की कृपा से और आप लोगों के प्यार से कि मुझे ज्यादा सोचना नहीं पड़ता। माय डे इस कंसिस्टेंट प्ले, चाहे वो मेरे एस्ट्रोलॉजी हो, चाहे मेरे स्पिरिचुअल लर्निंग हो, चाहे मेरी रीडिंग हो, चाहे कंटेंट क्रिएशन हो। मैं ऐसी किसी चीज पर काम नहीं करता जो मुझे अच्छे नहीं लगते।
जिंदगी पैसे या सक्सेस या एकोलेड या टाइटल्स इनकी नहीं बनी हुई, जिंदगी समय की बनी हुई है। यह एक लेसन है जो मैंने बहुत लेट सीखा है लाइफ में।
हम लोग क्या करते हैं? अपनी गर्दन फंसा लेते हैं या कोई अनाप शानाप सा टारगेट सेट कर लेते हैं कि जब तक यह नहीं होगा, मैं चैन से नहीं बैठूंगा। मैं खुश नहीं रहूंगा और एक के बाद एक टारगेट सेट करते-करते जिंदगी कब बीत जाती है, समझ में नहीं आता।
सो गाइस, टेक इट फ्रॉम डबल कैप्रिकॉर्न। एंबीशन इज द बिट्च।
The key to a good life is living in harmony with yourself. आप खुद को हालात के हिसाब से नहीं बदल सकते। यह मैंने पागलखाना कंपनीज में बहुत देखा। कि साहब, मैं इस डिपार्टमेंट में जाने के लिए यह कोर्स कर लूं या मैं उस डिपार्टमेंट में जाने के लिए वह कोर्स कर लूं। कोर्स करने से कुछ नहीं होता। अगर आपके अंदर वो टैलेंट नहीं है, तो आप किसी भी डिपार्टमेंट में चले जाएं। आप कुछ नहीं कर पाएंगे, लेकिन अगर अपने टैलेंट के अनुसार आप अपने जिंदगी डिजाइन करेंगे तो बहुत बेहतरी में रहेंगे।
मुझे बचपन से जॉब नहीं करना था बट हालात रहे कुछ डिलूजन्स रहे, जिनमें रहकर किया और अच्छा किया। मेरे को कोई इतना रिग्रेट नहीं है। मैं कॉर्पोरेट जॉब से 2016 में ही बाहर आ गया था। तब तक इतना बुरा हाल नहीं था, जितना आज है। सो आई एम थैंकफुल कि मैं समय पर बाहर आ गया।
मेरे शनि मेच्योरिटी के समय ही मैं इस तमाशे से मुक्त हो गया। केतु राहू ने मुझे लिबरेट कर दिया बट अब जब म देखता हूं मैं हर रोज अपने बनाने वाले का शुक्र अदा करता हूं कि कम से कम मैं कॉर्पोरेट्स में काम नहीं कर रहा। उन खूबसूरत एयर कंडीशन्ड दड़बों में नहीं बैठा हुआ। आज मैं अपनी जिंदगी खुली हवा में जीता हूं। मेरा अपना एक छोटा सा ऑफिस है। वो मेरे हिसाब से चलता है।
मुझे किसी को सलाम नहीं ठोकना। कोई मेरा परफॉर्मेंस अप्रैज़ल नहीं कर रहा। कोई मेरे को ओन नहीं करता। कोई मेरी अंतरात्मा पर भारी नहीं है।
ऐसा नहीं है कि बोल दे, साहब, कल से ऑफिस का एड्रेस यह है, यहां पर जाना। मेट्रो में लटको, बस में बैठो। नो थैंक यू। मैं अपना ऑफिस, मेरा इतना करीब है कि मैं वहां तक चाहूं तो पैदल चलकर जा सकता हूं और अपनी शर्तों पर काम करता हूं। जो लोग मुझे सही लगते हैं उनके साथ मैं काम करता हूं। अगर कोई बदतमीजी करता है तो मैं नमस्कार करके आगे बढ़ जाता हूं। देखिए, बिजनेस में सबसे अच्छी बात क्या है? यू कैन टेल अ क्लाइंट टू गो टू हेल बट यू कैन टेल यू, यू कैन नॉट टेल योर बॉस टू गो टू हेल।
सो मैं जीता हूं लिबरेशन के लिए, एक खूबसूरत लाइफ जीने के लिए, जो मेरे अनुसार मैंने स्कल्प्ट की है, जो मैंने अपने अनुसार बनाई है। सो अगर मुझे सपने में भी यह आ जाए कि मैं कहीं नौकरी कर रहा हूं, मेरा कोई बॉस है और मेरा कोई ऑफिस है और मुझे मेट्रो पकड़ कर वहां पर जाना पड़ रहा है, भाई मैं तो अ-सपने में डिप्रेशन में चला जाता हूं। जैसे ही मेरी आंख खुलती है डर के मारे, मैं अपना बनाने वाले का शुक्रिया अदा करता हूं। कि आई एम नो लॉन्गर इन दिस मैडनेस। तो मैं यह जो एंड ऑफ जॉब धारा है, मैं इससे खुश हूं। क्योंकि इससे सारी दुनिया के लोगों को एक मौका मिलेगा खुद को रिसेट करने का, इस कॉर्पोरेट गुलामी से बाहर आने का, इस कॉर्पोरेट चंपिंग से बाहर आने का, LinkedIn जैसी वेबसाइट के दलदल से बाहर आने का। जी। हम लोगों को इतना बुरा ब्रेनवॉश किया गया है कि हम नौकरी के आगे सोच नहीं सकते। लाइफ इज नॉट मेड ऑफ मनी, लाइफ इज मेड ऑफ टाइम।
और एक समय था जब कंपनियां नहीं होती थीं। इंडिया में जो पहली कंपनी आई वो ईस्ट इंडिया कंपनी थी और सब हम सब उसके नतीजे जानते हैं। एक टाइम होगा जब कंपनीस नहीं रहेंगे। लोग तब भी जिंदा थे, लोग उसके बाद भी जिंदा रहेंगे।
हाँ, तो मैं यही कहूंगा। अपनी जरूरतें कम रखें और अपने को खुश रखें। कुछ नहीं रखता इस कॉर्पोरेट गुलामी में। आप कल मर जाएंगे, परसों आपका रिप्लेसमेंट हायर हो जाएगा। और हो सकता है, आप जब तक जन-- जितने आखिरी दिन तक जिंदा रहे, उसकी बिलिंग भी कर दे कंपनी। कंपनी किसी की सगी नहीं होती। इंसान, इंसान के काम आता है।
सो यह जो पागलखाना हमने खड़ा किया हुआ है कि आपस में कंपीट करो, अथॉरिटी की जय बोलो। हां। आई एम एंटी अथॉरिटी। मेरा रिवर्स एजिंग चालू है।
आज की डेट में मैं दिल से टीनेजर हूं। जवानी में, मैं एक बूढ़ा आदमी था। सो डबल कैप्रिकॉर्न होने के फायदे होते हैं। आज की डेट में मेरी यूथ से बहुत बंटती है, बुजुर्गों से कम बनती है क्योंकि मैं जयकार्य नहीं करता किसी भी अथॉरिटी फिगर या अथॉरिटी सिस्टम के। सो माय मिशन थ्रू दिस चैनल इज टू लिबरेट पीपल।
अगर आपको लगता है लाइफ कोचिंग मैं ये सिखाऊंगा, आप रिज्यूमे कैसा बनाओ और तो-तुम्हें जॉब मिल जाएगी, तो आप गलत चैनल पर हो। आप प्लीज अनसब्सक्राइब कर दीजिए। बट अगर एक खूबसूरत जिंदगी जीनी है, अगर एक जिंदगी जीनी है, जिसमें कि आनंद रहे, जिसमें कि शांति रहे, तो यह चैनल आपके लिए है। मैंने कई बार सोचा भी कि इसका नाम ऑनेस्ट लाइफ को इसे बदल कर कुछ और रख दूं ताकि लोगों के दिमाग में यह नहीं रहे कि अब यह सिखाएगा कि अगला प्रमोशन कैसे पाएं या यू नो गर्लफ्रेंड कैसे बनाएं। यह सब बकवास बहुत से लोग कर रहे हैं।
आप उनके पास में जा सकें। हो सकता है। मैं ये बताऊंगा एक खूबसूरत ज़िन्दगी कम से कम में कैसे जीनी है और कैसे अपना वक्त अच्छा बिताना है। क्योंकि जिंदगी वक्त की बनी होती है। इस बात को याद रखिएगा। सो मेरे लिए एक नौकरी करना, मेरा सबसे बड़ा नाइटमेयर है। कोई भूत प्रेत, पिशाच के सपनों से ज्यादा डर मुझे और ज्यादा एजुकेशन मुझे नौकरी वाले सपनों से होता है। तो कई लोग हैं जिनका सपना एक नौकरी पाना है। हां, ठीक है। उम्र की भी बात होती है। मैं उनको गलत नहीं कहता। तो नौकरी करो। जितनी तनख्वाह मिलती है, उतनी करो। प्राण नहीं दे दो कंपनी के लिए। ये बूढ़ा आदमी ये गलती कर चुका है। आप लोग मत कीजिएगा। चेज यह पीस, चेज यह हैप्पीनेस। डोंट चेस द नेक्स्ट प्रमोशन, डोंट चेस द फ्लैशी जॉब। काम में मजा आ रहा है, दिल से काम करो, जमकर काम करो। काम से मोहब्बत करो, कंपनी से ना करो और काम की पूजा करो। कंपनी की गुलामी ना करो।
और एक बार अगर आपकी अवेकेनिंग हो गई तो आपको दुनिया की कोई कंपनी एंप्लॉयड नहीं रख सकती। मुझसे एक बार मेरे एक दोस्त ने पूछा भी था कि सारे vpसबसे इंपॉर्टेंट है जरूरतें कम रखो।
अ-मेरी मानो तो एक घर ले लो, भले से वन बीएचके हो। एक कोई वेहिकल भले से छोटा हो, अ-बट सिंपल हो, ज्यादा उसका लोड नहीं हो।
इसके अलावा, खाना तो हिंदुस्तान में सस्ता ही है; सरकार कभी महंगा होने देगी नहीं, डेमोक्रेसी है।
इसके अलावा, बाकी सब महंगी शादी, महंगा घर, महंगी education महंगी गाड़ी, फॉरेन वेकेशन ये सारे ट्रैप्स हैं ताकि तुम अगले 20-30-50 साल सिस्टम की गुलामी करते रहो।
जो मुझे यूरोप जाना है, मुझे अल्ट्रा लग्जरी चाहिए, ये सब गधे के आगे की gajar hai...
Mere dost ne ek baar bola बोले कि कितना पैसा मिलेगा तो जॉब कर लेगा। मैंने कहा ब्रो नॉट इनफ मनी इन द ब्लडी वर्ड। सो मैं इस मुकाम पर पहुंच चुका हूं। एंड आई एम रियली हैप्पी। मैं बहुत आम आदमी हूं। आई एम जस्ट मिडिल अपर मिडिल क्लास। मैं एक व्यक्ति हूं, जो अपनी तकरीबन एक खूबसूरत स्पीड पर अपनी शर्तों पे जी रहा है। तो मुझे बिलियनेयर बनना नहीं।
मुझे कोई शौक नहीं, मुझे किसी फैंसी टाइटल का कोई शौक नहीं। मैं अपना टीशर्ट पजामा लाइफस्टाइल में बहुत खुश हूं और मैं जब अपने दोस्तों को देखता हूं जो लैपटॉप से बंधे हुए हैं और कंपनीज की गुलामी कर रहे हैं, उनको कुछ नहीं समझ में आ रहा। आंखें धंस गई हैं तो मैं सोचता हूं अगर मैं रहता शायद मेरा इनसे बुरा हाल होता। बट थैंक गॉड। अब मैं समय पर जाग गया।
थैंक यू टू माय ज्योतिष मेरी रोटी बढ़िया चल रही है। थैंक्स टू मां भवानी फॉर लिबरेटिंग, मी फ्रॉम कॉरपोरेट स्लेवरी एंड ब्लेसिंग, मी विद ऑल दिस थैंक्स टू ऑल ऑफ यू। सोशल मीडिया ने मुझे सहारा दिया। मुझे जिंदा रखा और आज मैं यह सब आपसे शेयर कर पा रहा हूं। सो दिस मोर ऑफ रैंट। बट मुझे लगा आप लोगों से शेयर करना जरूरी है। कमेंट में बताइएगा आपको कैसा लगा यह वीडियो? बहुत हार्टफेल्ट वीडियो था इसमें। कुछ भी एजेंडा नहीं था, कोई स्ट्रक्चर नहीं था। बस एक कुछ दिल से निकली बातें थीं, जो मैं करना चाहता था। सो। आई होप दिस हेल्प। गॉड ब्लेस। जय माँ।